दशा कैलकुलेटर — वर्तमान महादशा और अंतर्दशा
अपने चंद्र नक्षत्र के आधार पर पूरी विंशोत्तरी दशा तालिका देखें। जानें कि इस समय कौन-सी ग्रह-अवधि चल रही है — और आगे महादशा, अंतर्दशा तथा प्रत्यंतर्दशा में क्या आने वाला है।
मुफ़्त विंशोत्तरी दशा कैलकुलेटर — महादशा, अंतर्दशा और प्रत्यंतर्दशा
अपनी जन्म जानकारी भरें और तुरंत जानें आपका चंद्र नक्षत्र तथा पूरी विंशोत्तरी महादशा, अंतर्दशा और प्रत्यंतर्दशा तालिका — साथ में वह ग्रह-अवधि जो अभी इसी समय चल रही है। कोई साइन-अप नहीं।
यह कैलकुलेटर चंद्रमा की सटीक खगोलीय स्थिति और लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश का उपयोग करता है — वही जो भारतीय ज्योतिष में मानक है। स्थितियाँ भूकेंद्रित हैं और मार्गदर्शन के लिए हैं। कुंडली-आधारित गहरे विश्लेषण, भाव-स्थिति और यह जानने के लिए कि हर अवधि आपके लिए क्या लेकर आ रही है, Om.AI ऐप खोलें।
अपनी वर्तमान महादशा और अंतर्दशा जानें
दशा कैलकुलेटर पर आने वाले ज़्यादातर लोगों का एक ही सवाल होता है: "अभी मेरी कौन-सी दशा चल रही है?" ऊपर दिया कैलकुलेटर ठीक यही बताता है। जन्म जानकारी भरते ही यह आपकी वर्तमान महादशा, उसके भीतर चल रही अंतर्दशा और आज चल रही प्रत्यंतर्दशा को हाइलाइट कर देता है — साथ में हर अवधि की शुरू और समाप्ति तिथि।
वैदिक ज्योतिष में समय-निर्धारण की सबसे उपयोगी जानकारी यही है। यह बताती है कि आप जीवन के किस ग्रह के "अध्याय" में हैं — जैसे गुरु महादशा में शुक्र की अंतर्दशा अक्सर वृद्धि, संबंध और धन को आगे रखती है, जबकि शनि की अवधि अनुशासन, परिश्रम और दीर्घकालिक स्थिरता की ओर झुकती है। अपनी वर्तमान दशा जान लेने से यह समझ आता है कि जीवन में इस समय कौन-से विषय सक्रिय हैं और बड़े फ़ैसले कब लेने चाहिए।
↑ ऊपर कैलकुलेटर का उपयोग करें और अभी अपनी दशा देखें, या Om.AI ऐप खोलकर जानें कि यह अवधि आपके करियर, विवाह, धन और स्वास्थ्य के लिए क्या कहती है।
विंशोत्तरी दशा क्या है?
विंशोत्तरी दशा वैदिक ज्योतिष में सबसे अधिक प्रयोग होने वाली ग्रह-काल प्रणाली है। यह 120 वर्ष का एक चक्र है, जो नौ ग्रहों (नवग्रह) में बँटा होता है और हर ग्रह एक निश्चित वर्ष-संख्या का स्वामी होता है। यह प्रणाली बताती है कि जीवन के किस चरण में किस ग्रह की ऊर्जा प्रमुख रहेगी। दक्षिण भारत में इसे दशा-भुक्ति भी कहा जाता है — दशा यानी महादशा और भुक्ति यानी अंतर्दशा।
आपका दशा-चक्र कहाँ से शुरू होगा, यह जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में था उससे तय होता है। 27 नक्षत्रों में से हर एक का स्वामी नौ दशा-ग्रहों में से कोई एक है। उस नक्षत्र में चंद्रमा किस अंश पर था, इससे तय होता है कि जन्म के समय पहली महादशा का कितना भाग पहले ही बीत चुका था — यही आपको चक्र में एक सटीक शुरुआती बिंदु देता है।
पश्चिमी ज्योतिष जहाँ मुख्यतः गोचर पर निर्भर करता है, वहीं दशा प्रणाली हर व्यक्ति के लिए ग्रह-प्रभाव की एक अलग, क्रमबद्ध समय-रेखा देती है — और यही इसे जयोतिष के सबसे सशक्त भविष्यसूचक साधनों में से एक बनाता है।
महादशा अवधि — 120 वर्ष का चक्र
विंशोत्तरी प्रणाली में हर ग्रह की अवधि निश्चित है। क्रम हमेशा यही रहता है:
| ग्रह | अवधि | स्वामी नक्षत्र |
|---|---|---|
| सूर्य | 6 वर्ष | कृत्तिका, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा |
| चंद्र | 10 वर्ष | रोहिणी, हस्त, श्रवण |
| मंगल | 7 वर्ष | मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा |
| राहु | 18 वर्ष | आर्द्रा, स्वाति, शतभिषा |
| गुरु | 16 वर्ष | पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वा भाद्रपद |
| शनि | 19 वर्ष | पुष्य, अनुराधा, उत्तरा भाद्रपद |
| बुध | 17 वर्ष | आश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती |
| केतु | 7 वर्ष | अश्विनी, मघा, मूल |
| शुक्र | 20 वर्ष | भरणी, पूर्वा फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा |
कुल: 6 + 10 + 7 + 18 + 16 + 19 + 17 + 7 + 20 = 120 वर्ष
जन्म नक्षत्र के अनुसार शुरुआती दशा
आपकी सबसे पहली महादशा जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में था, उससे तय होती है। 27 नक्षत्रों में से हर एक नौ दशा-स्वामियों में से किसी एक का है। चंद्रमा उस नक्षत्र में कितना आगे बढ़ चुका था, इससे आपका जन्म के समय का दशा-शेष तय होता है — यानी जन्म के समय उस ग्रह की महादशा का कितना भाग बाकी था। सटीक शेष के लिए ऊपर कैलकुलेटर का उपयोग करें; नीचे की तालिका हर नक्षत्र का शुरुआती दशा-स्वामी दिखाती है।
| जन्म नक्षत्र | शुरुआती दशा स्वामी | महादशा अवधि |
|---|---|---|
| अश्विनी | केतु | 7 वर्ष |
| भरणी | शुक्र | 20 वर्ष |
| कृत्तिका | सूर्य | 6 वर्ष |
| रोहिणी | चंद्र | 10 वर्ष |
| मृगशिरा | मंगल | 7 वर्ष |
| आर्द्रा | राहु | 18 वर्ष |
| पुनर्वसु | गुरु | 16 वर्ष |
| पुष्य | शनि | 19 वर्ष |
| आश्लेषा | बुध | 17 वर्ष |
| मघा | केतु | 7 वर्ष |
| पूर्वा फाल्गुनी | शुक्र | 20 वर्ष |
| उत्तरा फाल्गुनी | सूर्य | 6 वर्ष |
| हस्त | चंद्र | 10 वर्ष |
| चित्रा | मंगल | 7 वर्ष |
| स्वाति | राहु | 18 वर्ष |
| विशाखा | गुरु | 16 वर्ष |
| अनुराधा | शनि | 19 वर्ष |
| ज्येष्ठा | बुध | 17 वर्ष |
| मूल | केतु | 7 वर्ष |
| पूर्वाषाढ़ा | शुक्र | 20 वर्ष |
| उत्तराषाढ़ा | सूर्य | 6 वर्ष |
| श्रवण | चंद्र | 10 वर्ष |
| धनिष्ठा | मंगल | 7 वर्ष |
| शतभिषा | राहु | 18 वर्ष |
| पूर्वा भाद्रपद | गुरु | 16 वर्ष |
| उत्तरा भाद्रपद | शनि | 19 वर्ष |
| रेवती | बुध | 17 वर्ष |
नौ दशा-स्वामी नक्षत्रों के तीनों समूहों में एक ही क्रम में दोहराते हैं (केतु → शुक्र → सूर्य → चंद्र → मंगल → राहु → गुरु → शनि → बुध)।
Om.AI आपकी दशा कैसे निकालता है
जन्म का चंद्र नक्षत्र तय करता है
आपकी सही जन्म तिथि, समय और स्थान से ऐप चंद्रमा का सटीक देशांतर निकालता है। इससे तय होता है कि आपका चंद्रमा 27 में से किस नक्षत्र में है और कौन-सा ग्रह आपके दशा-चक्र की शुरुआत करता है।
जन्म के समय का दशा-शेष निकालता है
नक्षत्र के भीतर चंद्रमा की सटीक स्थिति से तय होता है कि जन्म के समय पहली महादशा का कितना भाग शेष था। अगर चंद्रमा शुक्र के नक्षत्र (20 वर्ष की अवधि) के आधे तक पहुँच चुका है, तो जीवन की शुरुआत लगभग 10 वर्ष शेष शुक्र महादशा से होती है। इस गणना में कला-स्तर की सटीकता ज़रूरी है।
पूरी समय-रेखा बनाता है
शुरुआती शेष से ऐप आपकी पूरी दशा समय-रेखा बनाता है — हर महादशा, अंतर्दशा और प्रत्यंतर्दशा, सटीक शुरू और समाप्ति तिथियों के साथ। इससे पूरे जीवन के ग्रह-प्रभावों का एक पूरा नक्शा सामने आ जाता है।
हर महादशा का जीवन पर क्या असर होता है
हर ग्रह की महादशा अपने विषय और ऊर्जा लेकर आती है। परिणाम इस बात पर निर्भर करते हैं कि वह ग्रह आपकी कुंडली में कितना बलवान है और कहाँ बैठा है।
सूर्य महादशा (6 वर्ष)
अधिकार, नेतृत्व, सरकारी संपर्क, पिता, ओज और आत्मविश्वास के विषय। बलवान सूर्य पहचान और करियर में उन्नति देता है। पीड़ित सूर्य अहं के टकराव या हृदय और हड्डियों से जुड़ी परेशानियाँ ला सकता है।
चंद्र महादशा (10 वर्ष)
भावनाएँ, मन, माता, सार्वजनिक जीवन, यात्रा और पालन-पोषण पर ज़ोर। बलवान चंद्रमा की अवधि मानसिक शांति, लोकप्रियता और अच्छे संबंध देती है। कमज़ोर चंद्रमा भावनात्मक उथल-पुथल, चिंता या अस्थिरता ला सकता है।
मंगल महादशा (7 वर्ष)
ऊर्जा, साहस, भूमि-संपत्ति, भाई-बहन, तकनीकी कौशल और प्रतिस्पर्धा। बलवान मंगल संपत्ति, खेल, इंजीनियरिंग या सेना में सफलता देता है। पीड़ित मंगल दुर्घटना, विवाद या क़ानूनी उलझन दे सकता है।
राहु महादशा (18 वर्ष)
सबसे लंबी अवधियों में से एक। राहु अपरंपरागत तरक़्क़ी, विदेश संपर्क, तकनीक, अचानक लाभ या हानि और सांसारिक महत्वाकांक्षा लाता है। परिणाम बहुत हद तक राहु के भाव और राशि पर निर्भर करते हैं। यह अवधि अक्सर जीवन में अप्रत्याशित मोड़ लाती है।
गुरु महादशा (16 वर्ष)
विस्तार, ज्ञान, अध्यात्म, संतान, धन और उच्च शिक्षा। गुरु स्वाभाविक शुभ ग्रह है — इसकी महादशा अक्सर समृद्धि, विवाह, संतान-सुख और आध्यात्मिक वृद्धि लाती है। मध्यम स्थिति का गुरु भी प्रायः रक्षा करता है।
शनि महादशा (19 वर्ष)
सबसे लंबी महादशा। शनि अनुशासन, परिश्रम, कर्म, आयु, सेवा और देर से मिलने वाले पर टिकाऊ परिणाम देता है। बलवान शनि धैर्य का फल करियर की स्थिरता और अधिकार के रूप में देता है। कमज़ोर शनि कठिनाई, देरी और पुरानी बीमारियाँ दे सकता है।
बुध महादशा (17 वर्ष)
संवाद, बुद्धि, व्यापार-कौशल, शिक्षा और विश्लेषण। बुध की अवधि सीखने, व्यापार, लेखन और संपर्क बढ़ाने के लिए अनुकूल रहती है। बलवान बुध व्यावसायिक सफलता और बौद्धिक उपलब्धि देता है।
केतु महादशा (7 वर्ष)
अध्यात्म, वैराग्य, अचानक अंतर्दृष्टि, पूर्वजन्म का कर्म और मुक्ति। केतु की अवधि अक्सर आत्म-चिंतन, आध्यात्मिक अनुभव और भौतिक मोह छोड़ने की इच्छा लाती है। यह अचानक स्वास्थ्य समस्या या दिशा-परिवर्तन भी दे सकती है।
शुक्र महादशा (20 वर्ष)
सबसे लंबी एकल महादशा। शुक्र प्रेम, विवाह, वैभव, कला, वाहन और भौतिक सुख का कारक है। बलवान शुक्र की अवधि प्रेम, धन, रचनात्मक सफलता और जीवन का आनंद लाती है। पीड़ित शुक्र संबंधों में कठिनाई या अति-भोग दे सकता है।
अंतर्दशा और प्रत्यंतर्दशा
हर महादशा नौ अंतर्दशाओं में बँटती है — हर ग्रह की एक। अंतर्दशा महादशा के फल को बदलती है और दो ग्रहों की ऊर्जा को मिला देती है। उदाहरण के लिए, गुरु महादशा में शनि की अंतर्दशा विस्तार (गुरु) और अनुशासन (शनि) का मिश्रण लाती है, जो अक्सर व्यवस्थित तरक़्क़ी या करियर की मज़बूती के रूप में दिखता है।
हर अंतर्दशा आगे नौ प्रत्यंतर्दशाओं में बँटती है, जिससे ग्रह-प्रभाव की तीसरी परत जुड़ जाती है। किसी भी क्षण आपकी दशा प्रणाली में तीन ग्रह सक्रिय रहते हैं — महादशा, अंतर्दशा और प्रत्यंतर्दशा — और यही हर चरण को उसकी अपनी विशिष्ट पहचान देता है।
Om.AI तीनों स्तर निकालता है और उन्हें आपकी कुंडली वाले हिस्से में दिखाता है, ताकि आप देख सकें कि इस समय कौन-सा संयोजन सक्रिय है और आगे कौन-से बदलाव आने वाले हैं।
अपनी वर्तमान दशा कैसे देखें
Om.AI डाउनलोड करें
ऐप Google Play या App Store से लें।
जन्म जानकारी भरें
अपनी जन्म तिथि, सही जन्म समय और जन्म स्थान डालें। दशा गणना में सही जन्म समय ख़ास तौर पर ज़रूरी है — कुछ मिनट का अंतर भी जन्म के समय का दशा-शेष बदल सकता है।
अपनी दशा तालिका देखें
आपकी पूरी विंशोत्तरी दशा तालिका ऐप के कुंडली वाले हिस्से में दिखती है — वर्तमान महादशा, अंतर्दशा और प्रत्यंतर्दशा, हर अवधि की तिथियों के साथ। आप AI चैट से यह भी पूछ सकते हैं कि यह दशा करियर, संबंध, स्वास्थ्य या किसी और क्षेत्र के लिए क्या कहती है।
अपनी दशा तालिका देखें
Om.AI डाउनलोड करें, जन्म जानकारी भरें और तुरंत देखें कि इस समय कौन-सी ग्रह-अवधि आपके जीवन को दिशा दे रही है — और आगे क्या आने वाला है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
विंशोत्तरी दशा क्या है?
विंशोत्तरी दशा वैदिक ज्योतिष की सबसे प्रचलित ग्रह-काल प्रणाली है। यह 120 वर्ष का चक्र है, जो नौ ग्रहों में बँटा होता है और हर ग्रह एक निश्चित वर्ष-संख्या का स्वामी होता है। आपका दशा-चक्र कहाँ से शुरू होगा, यह जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में था उससे तय होता है। हर महादशा आगे अंतर्दशा और प्रत्यंतर्दशा में बँटती है।
मेरी वर्तमान दशा कैसे पता करें?
इस पेज पर दिए मुफ़्त कैलकुलेटर में अपनी जन्म तिथि, जन्म समय और समय-क्षेत्र भरें। यह तुरंत आपकी वर्तमान महादशा, अंतर्दशा और प्रत्यंतर्दशा दिखा देता है, साथ में हर अवधि की तिथियाँ और पूरी महादशा तालिका। कुंडली-आधारित विस्तृत विश्लेषण के लिए Om.AI ऐप खोलें।
शुरुआती दशा की गणना कैसे होती है?
आपकी पहली महादशा जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में था, उससे तय होती है। 27 नक्षत्रों में से हर एक का स्वामी नौ दशा-ग्रहों में से कोई एक होता है। जन्म के समय चंद्रमा उस नक्षत्र में कितनी दूर पहुँच चुका था, इसी अनुपात से तय होता है कि उस ग्रह की महादशा का कितना भाग बीत चुका है और कितना शेष है — इसे जन्म के समय की दशा-शेष कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा में क्या अंतर है?
महादशा बड़ी ग्रह-अवधि है जो कई वर्षों तक चलती है — जैसे गुरु महादशा 16 वर्ष की होती है। अंतर्दशा उसी महादशा के भीतर की उप-अवधि है; हर महादशा में नौ अंतर्दशाएँ होती हैं, क्रम से नौ ग्रहों की। अंतर्दशा महादशा के प्रभाव को बदलती है। जैसे गुरु महादशा में शुक्र की अंतर्दशा गुरु के विस्तार को शुक्र के संबंध और सुख-सुविधा वाले भावों से मिला देती है।
प्रत्यंतर्दशा क्या है और क्या यह कैलकुलेटर उसे दिखाता है?
प्रत्यंतर्दशा विंशोत्तरी दशा प्रणाली का तीसरा स्तर है — हर अंतर्दशा के भीतर की उप-उप-अवधि। हर अंतर्दशा नौ प्रत्यंतर्दशाओं में बँटती है। हाँ, यह कैलकुलेटर आपकी वर्तमान प्रत्यंतर्दशा दिखाता है, साथ में चल रही अंतर्दशा के भीतर की पूरी प्रत्यंतर्दशा सूची — यानी तीनों सक्रिय स्तर एक साथ।
क्या अकेली दशा से जीवन की घटनाएँ तय होती हैं?
नहीं। दशा बताती है कि कौन-सा ग्रह-प्रभाव कब सक्रिय है, पर परिणाम इस बात पर निर्भर करते हैं कि वे ग्रह आपकी कुंडली में कितने बलवान हैं और किस भाव में बैठे हैं। गुरु महादशा का फल उस व्यक्ति के लिए अलग होगा जिसका गुरु कर्क में उच्च का है, और उससे अलग जिसका गुरु मकर में नीच का है। गोचर भी दशा के फल को बदलता है। Om.AI इन सब कारकों को एक साथ देखता है।
अगर मुझे अपना सही जन्म समय पता न हो तो?
कैलकुलेटर में "मुझे अपना सही जन्म समय नहीं पता" पर टिक करें — गणना दोपहर 12:00 बजे के लिए हो जाएगी। चंद्रमा लगभग हर सवा दिन में एक नक्षत्र बदलता है, इसलिए अगर आपका जन्म नक्षत्र-संधि के आसपास हुआ है तो सही समय से परिणाम बदल सकता है। सटीक दशा-शेष के लिए जन्म समय जितना सही हो, उतना अच्छा।
क्या Om.AI मेरी वर्तमान दशा के बारे में बता सकता है?
हाँ। आप ऐप में अपनी वर्तमान या आने वाली दशा के बारे में सीधे सवाल पूछ सकते हैं। AI दशा-स्वामी की स्थिति, बल और भाव-स्वामित्व को आपकी कुंडली में देखता है, उस पर वर्तमान गोचर जोड़ता है, और करियर, विवाह, धन या स्वास्थ्य के हिसाब से समय-आधारित जवाब देता है। पहला सवाल मुफ़्त मिलता है और रोज़ ऐप खोलकर स्ट्रीक से और सवाल कमाए जा सकते हैं।