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मेरी शादी किससे होगी?

जन्म तिथि, समय और शहर डालें — नीचे का मुफ़्त कैलकुलेटर आपका सप्तम भाव और सप्तमेश निकालकर जीवनसाथी के स्वभाव, क्षेत्र, दिशा और दूरी के संकेत दिखाता है। कोई साइन-अप नहीं।

पहली रीडिंग मुफ़्त। हिंदी और English दोनों में। शादी कब होगी, यह पूछना है? विवाह समय कैलकुलेटर देखें →

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अपने जीवनसाथी के संकेत निकालें

जन्म विवरण भरें। आपकी कुंडली से सप्तम भाव, उस पर पड़ने वाली राशि और सप्तमेश निकालकर जीवनसाथी के स्वभाव, संभावित क्षेत्र, दिशा और दूरी के पारंपरिक संकेत दिखाए जाएँगे। कोई साइन-अप नहीं, कोई शुल्क नहीं।

सप्तम भाव लग्न से तय होता है, और लग्न हर दो घंटे में बदलता है — इसलिए जन्म समय ज़रूरी है। अनुमान लगाने पर पूरा सप्तम भाव ही बदल सकता है।


शादी किससे होगी? — वैदिक उत्तर

"मेरी शादी किससे होगी" का ईमानदार उत्तर यह है कि कुंडली नाम नहीं बताती — वह विवरण बताती है। किसी भी शास्त्रीय ग्रंथ में जीवनसाथी का नाम निकालने का नियम नहीं है। जो है वह यह है: जीवनसाथी का स्वभाव कैसा होगा, वह किस तरह के काम से जुड़ा होगा, किस पृष्ठभूमि से आएगा, किस दिशा और कितनी दूरी से आएगा, और आपके साथ उसका रिश्ता किस ढंग का होगा।

संक्षिप्त उत्तर

जीवनसाथी का विवरण चार जगहों से निकलता है: (1) सप्तम भाव की राशि — मूल स्वभाव, (2) सप्तमेश और वह किस भाव-राशि में बैठा है — व्यक्तित्व, क्षेत्र और दिशा, (3) दाराकारक — जीवनसाथी की भीतरी प्रकृति, और (4) नवांश (D9) — रिश्ता निभेगा कैसा। पाँचवाँ, कम जाना-पहचाना संकेतक उपपद लग्न है, जो बताता है कि जीवनसाथी और आपकी शादी दुनिया को कैसी दिखेगी।

यह विवरण जन्म के साथ तय हो जाता है और बदलता नहीं — इसीलिए यह सवाल "शादी कब होगी" से अलग है। समय दशा और गोचर के साथ आगे-पीछे खिसकता है; जीवनसाथी का विवरण नहीं।


सप्तमेश और सप्तम भाव की राशि

सप्तम भाव विवाह और जीवनसाथी का भाव है। उस पर जो राशि पड़ती है वह जीवनसाथी का मूल रंग तय करती है, और उस राशि का स्वामी — सप्तमेश — सबसे मज़बूत अकेला संकेतक है। नीचे की तालिका बताती है कि सप्तमेश के रूप में कौन सा ग्रह आने पर पारंपरिक पाठ क्या रहता है। राहु और केतु किसी राशि के स्वामी नहीं होते, इसलिए वे सप्तमेश नहीं बनते — पर वे सप्तम भाव में बैठकर उसे उतना ही प्रभावित करते हैं, और उनकी अलग पंक्तियाँ नीचे दी हैं।

ग्रहजीवनसाथी का स्वभावसंभावित क्षेत्रदिशा
सूर्यआत्मसम्मानी, स्पष्ट, नेतृत्व वाला — अपनी बात रखने में झिझकता नहींप्रशासन, सरकारी विभाग, चिकित्सा, राजनीति, किसी संस्था में वरिष्ठ भूमिकापूर्व
चंद्रभावुक, देखभाल करने वाला, घर और परिवार से जुड़ाशिक्षा, स्वास्थ्य/नर्सिंग, आतिथ्य, जनसंपर्क, जल या तरल से जुड़ा कामवायव्य (उत्तर-पश्चिम)
मंगलऊर्जावान, सीधा, पहल करने वाला — बहस से नहीं बचताइंजीनियरिंग, सेना/पुलिस, सर्जरी, ज़मीन-जायदाद, तकनीकी कामदक्षिण
बुधबातूनी, तेज़ दिमाग़ वाला, अक्सर उम्र से छोटा दिखने वालाव्यापार, लेखन, अकाउंट्स, IT, शिक्षण, संचारउत्तर
गुरुसिद्धांतवादी, सलाह देने वाला, पढ़ा-लिखा — परिवार में सम्मानितशिक्षण, क़ानून, वित्त/बैंकिंग, परामर्श, धार्मिक-सामाजिक कार्यईशान (उत्तर-पूर्व)
शुक्रसलीक़ेदार, सौंदर्य-प्रेमी, रिश्ते को सहज बनाने वालाकला, डिज़ाइन, फ़ैशन/सौंदर्य, मीडिया, आतिथ्य, लक्ज़री से जुड़ा कामआग्नेय (दक्षिण-पूर्व)
शनिगंभीर, धैर्यवान, ज़िम्मेदार — अक्सर उम्र या सोच में परिपक्वसेवा/नौकरी, श्रम-आधारित उद्योग, ठेकेदारी, खनन-लोहा, लंबे समय से चली आ रही भूमिकापश्चिम
राहु (केवल सप्तम में बैठकर)अलग सोच वाला, परंपरा से हटकर — अक्सर दूसरी संस्कृति, भाषा या समुदाय सेतकनीक, विदेश से जुड़ा काम, मीडिया, अपरंपरागत पेशेनैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम)
केतु (केवल सप्तम में बैठकर)अंतर्मुखी, अलग-थलग रहने वाला, कर्मिक जुड़ाव का एहसास देने वालाशोध, अध्यात्म, चिकित्सा, विशेषज्ञता वाला तकनीकी कामपारंपरिक ग्रंथों में केतु की दिशा एकमत नहीं — इसे दिशा-संकेत न मानें

यह तालिका अकेले सप्तमेश की है। असली पाठ में सप्तमेश किस भाव और किस राशि में बैठा है, उस पर किसकी दृष्टि है, और सप्तम भाव में कौन बैठा है — ये सब मिलकर तस्वीर बदल देते हैं। एक ही सप्तमेश दो कुंडलियों में दो अलग जीवनसाथी दिखा सकता है।


दिशा और दूरी — जीवनसाथी कहाँ से आएगा?

"घर से कितनी दूरी पर शादी होगी" और "जीवनसाथी किस दिशा से आएगा" — दोनों के लिए परंपरा में साफ़ नियम हैं, पर उन्हें संकेत की तरह पढ़ना चाहिए, नक़्शे की तरह नहीं।

दिशा — दो तरीक़े

पहला: सप्तमेश की अपनी दिशा — सूर्य पूर्व, शुक्र आग्नेय, मंगल दक्षिण, राहु नैऋत्य, शनि पश्चिम, चंद्र वायव्य, बुध उत्तर, गुरु ईशान।
दूसरा: सप्तम भाव की राशि का तत्व — अग्नि पूर्व, पृथ्वी दक्षिण, वायु पश्चिम, जल उत्तर।
दोनों हमेशा एक ही दिशा नहीं देते। जब दोनों मिलते हैं तब संकेत मज़बूत है; जब नहीं मिलते तो दिशा पर ज़ोर देना ग़लत है।

दूरी — राशि के स्वभाव से

चर राशि (मेष, कर्क, तुला, मकर) सप्तम में — रिश्ता दूर से आने की संभावना: दूसरा शहर, दूसरा राज्य, कभी विदेश।
स्थिर राशि (वृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुंभ) — पास से: अपना ही शहर, मोहल्ला, या पहले से परिचित दायरा।
द्विस्वभाव राशि (मिथुन, कन्या, धनु, मीन) — बीच की दूरी; अक्सर पढ़ाई या नौकरी के सिलसिले में बने संपर्क से।

विदेश या दूसरी संस्कृति

सप्तम भाव या सप्तमेश का बारहवें भाव से जुड़ाव, या सप्तम में राहु — ये पारंपरिक रूप से दूर देश, दूसरी भाषा या दूसरे समुदाय के जीवनसाथी की ओर इशारा करते हैं। अकेला संकेत काफ़ी नहीं; दो या तीन एक साथ मिलें तभी वज़न है।

यह क्या नहीं बताता

दिशा और दूरी के नियम आज के हिसाब से नरम पड़ चुके हैं — जब लोग काम के लिए देश भर में जाते हों, तो "पास" और "दूर" का मतलब वही नहीं रहता जो ग्रंथों के समय था। इन्हें प्रवृत्ति समझें, पते की तरह नहीं।


स्वभाव और पेशा — दाराकारक और सप्तमेश साथ में

सप्तमेश जीवनसाथी का बाहरी ढाँचा देता है — क्षेत्र, पृष्ठभूमि, दिखने वाला व्यक्तित्व। भीतरी प्रकृति के लिए जैमिनी पद्धति का दाराकारक देखा जाता है। दोनों को साथ पढ़ने पर तस्वीर पूरी होती है।

सप्तमेश

विवाह की घटना और जीवनसाथी का बाहरी विवरण। वह जिस भाव में बैठा है, अक्सर उसी क्षेत्र से मुलाक़ात होती है — दसवें में काम की जगह, पाँचवें में पढ़ाई या साझा शौक़, ग्यारहवें में दोस्तों का दायरा।

दाराकारक (DK)

सात दृश्य ग्रहों में जो अपनी राशि में सबसे कम अंश पर हो — वही दाराकारक। बृहत् पराशर होरा शास्त्र अध्याय 32। यह जीवनसाथी की भीतरी प्रकृति बताता है, घटना नहीं।

उपपद लग्न (UL)

बारहवें भाव का अरुढ़ पद। यह बताता है कि जीवनसाथी और आपकी शादी बाहर से कैसी दिखेगी — दाराकारक की भीतरी प्रकृति से अलग चीज़।

शुक्र और गुरु

शुक्र प्रेम और जीवनसाथी का नैसर्गिक कारक है — पुरुष की कुंडली में पत्नी का भी। स्त्री की कुंडली में गुरु परंपरागत रूप से पति का कारक माना जाता है। ये सप्तमेश के पाठ को मज़बूत या कमज़ोर करते हैं।

नवांश (D9)

नवांश लग्न और उसका स्वामी, D9 का सप्तम भाव, और D9 में शुक्र। D1 वादा दिखाता है, D9 बताता है वह निभेगा कैसा।

सप्तम में बैठे ग्रह

सप्तम भाव में कोई ग्रह बैठा हो तो अक्सर वह सप्तमेश से भी ज़्यादा बोलता है — जीवनसाथी में उस ग्रह के गुण साफ़ दिखते हैं।


नवांश (D9) — रिश्ता निभेगा कैसा

नवांश विवाह का विभागीय चार्ट है। हर राशि के 30° को नौ हिस्सों में बाँटकर बनने वाला यह चार्ट पारंपरिक रूप से जीवनसाथी और वैवाहिक जीवन का सबसे भरोसेमंद दूसरा दृश्य माना जाता है। तीन चीज़ें देखी जाती हैं:

1

नवांश लग्न और उसका स्वामी

यह आपके वैवाहिक जीवन का आधार तय करता है — और अक्सर उस माहौल का भी संकेत देता है जिसमें जीवनसाथी पला-बढ़ा है।

2

D9 का सप्तम भाव और उसका स्वामी

D1 का सप्तम भाव वादा है; D9 का सप्तम भाव उस वादे की गहराई है। दोनों में जो साझा है, वही सबसे भरोसेमंद संकेत है।

3

D9 में शुक्र (और स्त्री की कुंडली में गुरु)

वर्गोत्तम शुक्र — यानी D1 और D9 दोनों में एक ही राशि — पारंपरिक रूप से रिश्ते में स्थिरता का संकेत है। D1 में कमज़ोर पर D9 में मज़बूत ग्रह का पाठ यह है कि रिश्ता शुरुआत से बेहतर निकलता है।

Om.AI हर कुंडली के साथ D1 और D9 दोनों बनाता है — मुफ़्त कुंडली देखें


प्रेम विवाह होगा या अरेंज मैरिज?

यह Om.AI से सबसे ज़्यादा पूछे जाने वाले विवाह-सवालों में है, और इसका ईमानदार जवाब पहले दे देना ज़रूरी है: ऊपर का कैलकुलेटर यह वर्गीकरण नहीं करता, और कोई भी गणना इसे पक्का नहीं बता सकती। यह चुनाव, परिवार और परिस्थिति — तीनों पर निर्भर करता है। कुंडली सिर्फ़ झुकाव दिखाती है। परंपरा में जिन संकेतों को देखा जाता है, वे ये हैं:

प्रेम विवाह की ओर झुकाव

पंचम भाव (प्रेम) और सप्तम भाव (विवाह) के बीच सीधा जुड़ाव — पंचमेश का सप्तम में जाना, सप्तमेश का पंचम में जाना, दोनों का आपस में परिवर्तन, या आपसी दृष्टि। इसके साथ शुक्र और मंगल का संबंध, और पंचम या सप्तम में राहु — जो परंपरा से हटकर, अपनी पसंद से बना रिश्ता दिखाता है।

परिवार के ज़रिये तय रिश्ते की ओर झुकाव

सप्तमेश का दूसरे भाव (परिवार), नवम भाव (परंपरा, बड़े-बुज़ुर्ग) या एकादश भाव से जुड़ाव; सप्तम भाव पर गुरु या शनि का असर, जो रिश्ते को परंपरा और स्वीकृति के रास्ते ले जाता है। सप्तमेश का अपने ही घर में मज़बूत बैठना भी अक्सर सीधा-सादा, परिवार-समर्थित विवाह दिखाता है।

असली बात

ज़्यादातर कुंडलियों में दोनों तरफ़ के संकेत एक साथ मिलते हैं — और आजकल बहुत से विवाह बीच के होते हैं: पसंद अपनी, स्वीकृति परिवार की। इसलिए किसी भी टूल का "आपकी लव मैरिज होगी" जैसा दो-टूक जवाब भरोसे लायक़ नहीं है। जो पूछने लायक़ है वह यह है — मेरी कुंडली में पंचम और सप्तम भाव आपस में जुड़े हैं या नहीं, और कितना। यह Om.AI की AI चैट में अपनी कुंडली पर पूछा जा सकता है।


"जीवनसाथी के नाम का पहला अक्षर" — सच क्या है

बहुत सी वेबसाइटें जन्म तिथि डालकर जीवनसाथी के नाम का पहला अक्षर बता देती हैं। हम यह नहीं करते, और इसकी वजह साफ़ है।

जो असली है

नक्षत्र के हर चरण के लिए एक नामाक्षर तय है — अश्विनी के चार चरण चू, चे, चो, ला। यह तालिका शास्त्रीय है और आज भी इस्तेमाल होती है, पर इसका शास्त्रीय उपयोग नामकरण संस्कार में है: नवजात का नाम उसके अपने चंद्र-नक्षत्र के चरण से रखना।

जो जोड़ा गया है

उसी तालिका को सप्तमेश या दाराकारक के नक्षत्र पर लगाकर "जीवनसाथी के नाम का पहला अक्षर" निकालना एक आधुनिक विस्तार है — किसी शास्त्रीय ग्रंथ में यह नियम नहीं मिलता। इसे भविष्यवाणी कहना ग़लत है, और गलत निकलने पर यह ज्योतिष का ही भरोसा तोड़ता है।

इसलिए Om.AI नाम का अक्षर नहीं बताता। जो शास्त्रीय आधार पर बताया जा सकता है — स्वभाव, क्षेत्र, पृष्ठभूमि, दिशा, दूरी और रिश्ते का ढंग — वही बताता है।


पूरी रीडिंग कैसे लें

तीन steps। लगभग 2 मिनट। पहली रीडिंग मुफ़्त।

1

Om.AI डाउनलोड करें

Google Play या App Store से मुफ़्त install करें। अपनी जन्म तिथि, सटीक जन्म समय और जन्म शहर डालकर असली कुंडली (जन्म पत्री) generate करें — D1 और D9 दोनों बनते हैं।

2

पूछें "मेरा जीवनसाथी कैसा होगा?"

AI चैट खोलें और सवाल टाइप करें — हिंदी में ("मेरी शादी किससे होगी?"), अंग्रेज़ी में ("what will my spouse be like?"), या Hinglish में ("meri shadi kisse hogi?")। जवाब उसी भाषा में आएगा जिसमें आपने पूछा।

3

Follow-up सवाल पूछें

विशिष्ट हो जाएँ। "मेरा दाराकारक कौन सा ग्रह है?", "जीवनसाथी किस दिशा से आएगा?", "क्या पंचम और सप्तम भाव जुड़े हैं?", "क्या मैं मांगलिक हूँ?" — AI आपकी पिछली बातचीत याद रखता है।

मुफ़्त सवालों के बारे में

Om.AI install करते ही आपकी पहली AI रीडिंग मुफ़्त है। रोज़ ऐप खोलकर streak बनाएँ और सवाल कमाएँ — 3, 7, 14, 21, 30, 45, 60, 75 और 90 दिन के milestones पर कुल 19 मुफ़्त सवाल, दिन 30 पर 3 दिन Premium, दिन 60 पर महीने भर का forecast मुफ़्त और दिन 90 पर 7 दिन Premium मिलते हैं। दिन छूट जाए तो 2 streak freeze अपने-आप लग जाते हैं। Question packs और Premium (unlimited सवाल, 24/7) भी available हैं। किसी ख़ास व्यक्ति से मेल देखने के लिए कुंडली मिलान सबके लिए मुफ़्त है।


अपनी कुंडली पर पूरा जवाब पाएँ

ऊपर का कैलकुलेटर दो चीज़ें निकालता है — सप्तम भाव की राशि और सप्तमेश। Om.AI पूरी कुंडली पढ़ता है: सप्तमेश किस भाव में है, दाराकारक कौन है, उपपद लग्न क्या कहता है, नवांश में तस्वीर बदलती है या नहीं, और पंचम-सप्तम का जुड़ाव कितना है — और हिंदी, अंग्रेज़ी या Hinglish में आपके follow-up सवालों के जवाब देता है। पहली रीडिंग मुफ़्त।

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सामान्य सवाल

मेरी शादी किससे होगी — क्या कुंडली से जीवनसाथी का पता चलता है?

कुंडली जीवनसाथी का नाम या पहचान नहीं बताती। वह जो बताती है वह है जीवनसाथी का विवरण — स्वभाव, संभावित पेशा, परिवार की पृष्ठभूमि, दिशा और दूरी, और रिश्ते का ढंग। यह विवरण चार जगहों से निकलता है: सप्तम भाव और उसकी राशि, सप्तमेश की स्थिति, दाराकारक (जैमिनी का जीवनसाथी-कारक) और नवांश (D9) चार्ट। इन चारों को एक साथ पढ़ने पर एक तस्वीर बनती है, नाम नहीं।

सप्तम भाव और सप्तमेश से जीवनसाथी के बारे में क्या पता चलता है?

सप्तम भाव विवाह और जीवनसाथी का भाव है। उस पर पड़ने वाली राशि जीवनसाथी का मूल स्वभाव बताती है, और उस राशि का स्वामी — सप्तमेश — सबसे मज़बूत संकेतक है। सप्तमेश जिस ग्रह के रूप में आता है उसकी प्रकृति जीवनसाथी के व्यक्तित्व और काम के क्षेत्र का संकेत देती है: शुक्र सलीक़ा और कला, गुरु शिक्षा और सिद्धांत, शनि धैर्य और ज़िम्मेदारी, मंगल ऊर्जा और सीधापन, बुध संवाद और व्यापार, सूर्य अधिकार, चंद्र भावुकता। सप्तमेश किस भाव में बैठा है, यह भी उतना ही मायने रखता है — यही सप्तम भाव लग्न से तय होता है, इसलिए जन्म समय ज़रूरी है।

जीवनसाथी किस दिशा से आएगा? घर से कितनी दूरी पर शादी होगी?

दिशा पारंपरिक रूप से सप्तमेश की दिशा से देखी जाती है — सूर्य पूर्व, शुक्र आग्नेय, मंगल दक्षिण, राहु नैऋत्य, शनि पश्चिम, चंद्र वायव्य, बुध उत्तर, गुरु ईशान। दूसरा तरीक़ा सप्तम भाव की राशि के तत्व से है — अग्नि पूर्व, पृथ्वी दक्षिण, वायु पश्चिम, जल उत्तर। दोनों तरीक़े हमेशा एक ही दिशा नहीं देते, इसलिए इन्हें संकेत मानें, पता नहीं। दूरी का पारंपरिक नियम राशि के स्वभाव से है: चर राशि (मेष, कर्क, तुला, मकर) दूर का रिश्ता, स्थिर राशि (वृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुंभ) पास का, और द्विस्वभाव राशि (मिथुन, कन्या, धनु, मीन) मध्यम दूरी।

मेरी शादी लव मैरिज होगी या अरेंज?

इस पेज का कैलकुलेटर यह वर्गीकरण नहीं करता — कोई भी गणना यह पक्का नहीं बता सकती, क्योंकि यह चुनाव और परिस्थिति दोनों पर निर्भर करता है। पारंपरिक रूप से जिन संकेतों को देखा जाता है वे ये हैं: पंचम भाव (प्रेम) और सप्तम भाव (विवाह) के बीच जुड़ाव — पंचमेश का सप्तम में या सप्तमेश का पंचम में जाना, दोनों का परिवर्तन योग या आपसी दृष्टि; शुक्र और मंगल का संबंध; सप्तम या पंचम में राहु, जो परंपरा से हटकर रिश्ता ला सकता है। दूसरी ओर सप्तमेश का दूसरे, नवम या एकादश भाव से जुड़ाव और शनि-गुरु का प्रभाव परिवार के ज़रिये तय हुए रिश्ते की ओर झुकता है। असल में ज़्यादातर कुंडलियों में दोनों तरफ़ के संकेत मिलते हैं।

दाराकारक क्या है और यह जीवनसाथी के बारे में क्या बताता है?

दाराकारक जैमिनी पद्धति का जीवनसाथी-कारक है (बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 32)। सात दृश्य ग्रहों — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि — में जो अपनी राशि में सबसे कम अंश पर होता है, वही दाराकारक कहलाता है। यह सप्तमेश से अलग चीज़ बताता है: सप्तमेश विवाह की घटना और समय का संकेतक है, जबकि दाराकारक जीवनसाथी के भीतरी स्वभाव का। Om.AI इसे हर कुंडली के लिए गणना करता है और विवाह के सवालों में सप्तमेश तथा उपपद लग्न के साथ मिलाकर पढ़ता है।

क्या नाम के पहले अक्षर से जीवनसाथी का पता चल सकता है?

सीधा जवाब — नहीं, और हम ऐसा दावा नहीं करते। नक्षत्र-चरण के नामाक्षर की तालिका (चू, चे, चो, ला…) असली और शास्त्रीय है, पर उसका शास्त्रीय उपयोग नामकरण संस्कार में है — यानी नवजात का नाम उसके अपने चंद्र-नक्षत्र के चरण से रखना। उसी तालिका को सप्तमेश या दाराकारक के नक्षत्र पर लगाकर "जीवनसाथी के नाम का पहला अक्षर" निकालना एक आधुनिक विस्तार है, किसी शास्त्रीय ग्रंथ का नियम नहीं। इसलिए Om.AI नाम का अक्षर नहीं बताता — वह वही बताता है जिसका शास्त्रीय आधार है: स्वभाव, पृष्ठभूमि, दिशा, दूरी और रिश्ते का ढंग।

नवांश (D9) चार्ट जीवनसाथी के बारे में क्या बताता है?

नवांश विवाह और जीवनसाथी का विभागीय चार्ट है। D1 (मुख्य कुंडली) वादा दिखाता है, D9 बताता है कि वह वादा कितना निभेगा। जीवनसाथी के लिए तीन चीज़ें देखी जाती हैं: नवांश लग्न और उसका स्वामी, नवांश का सप्तम भाव तथा उसका स्वामी, और D9 में शुक्र की स्थिति। अगर सप्तमेश D1 में कमज़ोर है पर D9 में मज़बूत हो जाता है, तो पारंपरिक पाठ यह है कि रिश्ता शुरुआत से बेहतर निकलता है। Om.AI हर कुंडली के साथ D9 चार्ट भी बनाता है।

क्या यह कैलकुलेटर मुफ़्त है? क्या साइन-अप करना होगा?

इस पेज का कैलकुलेटर पूरी तरह मुफ़्त है और इसके लिए कोई साइन-अप, ईमेल या फ़ोन नंबर नहीं चाहिए — जन्म तिथि, समय, शहर और समय क्षेत्र भरें और नतीजा उसी पेज पर मिल जाएगा। यह 18 साल से ऊपर के लोगों के लिए है। अगर आप पूरी कुंडली पर बातचीत चाहते हैं तो Om.AI ऐप में पहली रीडिंग मुफ़्त है, और रोज़ ऐप खोलकर streak बनाने पर और सवाल मिलते हैं।

शादी किससे होगी और शादी कब होगी — दोनों में क्या फ़र्क़ है?

दोनों एक ही सप्तम भाव से निकलते हैं पर अलग चीज़ें पूछते हैं। "किससे" जीवनसाथी का विवरण है — यह सप्तम भाव की राशि, सप्तमेश की स्थिति, दाराकारक और नवांश से आता है और यह जन्म से तय है, समय के साथ बदलता नहीं। "कब" समय है — यह चालू विंशोत्तरी दशा और सप्तम भाव पर गुरु-शनि के गोचर के संगम से निकलता है और आगे-पीछे खिसकता रहता है। समय के लिए हमारा अलग पेज है: शादी कब होगी

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